"समय” - यह वह शब्द है, जिससे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की शुरूआत होती है। समय के बिना हम अपनी जिंदगी को सुचारू रूप से नहीं जी सकते और ना ही सभी काम सुचारू रूप से कर सकते है। “जो व्यक्ति समय की कीमत को पहचानता है, सफलता खुद-ब-खुद उसके कदम चूमती हैं।“
आप खुद ही सोचिए क्या आपका एक भी दिन बिना टाईम देखे बीतता है, नहीं न। कैसे बीत सकता हैं क्योंकि आपका सोना-जागना, खाना-पीना, आना-जाना और आपके सभी काम "टाईम मैनेजमेंट" पर डिपेंड करते हैं। यदि दिनचर्या का एक भी काम आप समयानुसार नहीं करते हैं तो आपके सभी काम गड़बड़ा जाते है। चलिए मैं आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताती हूँ, जिसे समय की कीमत का अनुभव एक बहुत बड़ा मौका खोने के बाद हुआ :
मि. राज जो कि एक मैनेजमेंट स्टुडेंट रह चुके है, उन्हें एक बहुत बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी से जॉब का ऑफर मिला। उन्हें इंटरव्यु के लिए सुबह 10:30 टाईम दिया गया । लेकिन वे उस दिन 10:30 के बजाय 10:45 पर पहुँचे । और सबसे पहले इंटरव्यु में उनके टाईम मैनेजमेंट को ही देखा गया और उस पर से यह "निष्कर्ष" निकाला गया कि जो व्यक्ति समय पर ऑफिस नहीं पहुँच सकता, वह किसी भी काम को कैसे समय पर पूरा कर सकता है, इसलिए राज को उस जॉब के काबिल नहीं समझा गया। इस तरह से राज ने समय की कीमत को न पहचानकर बहुत बड़ा मौका गँवा दिया।
तो देखा आपने कि मि. राज की तरह, हम कितनी बार समय को महत्व न देकर, जिंदगी में कई ऐसे मौके गँवा देते है, जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और जो हमारी लाईफ भी बदल सकते हैं। इसलिए समय की हमारे जीवन में बहुत कीमत है। यह कथन सत्य है कि –
"जो समय को नष्ट करता है, समय भी उसे नष्ट कर देता है"। समय का हनन करने वाले व्यक्ति का चित्त सदा उद्विग्न रहता है, और वह असहाय तथा भ्रमित होकर यूं ही भटकता रहता है।“
यदि हम अपने काम की शुरूआत सुचारु रूप से करें, तो हम उन लाखों लोगों को पीछे छोड़ कर आगे निकल सकते हैं, जो इस भाग-दौड़ वाली जिंदगी में समय के साथ-साथ एक-एक क्षण की कीमत को भूल चूकें हैं। कामयाबी की पहली सीढ़ी "समय" हैं। यदि हम अपनी मंजिल की पहली सीढ़ी को ही पा नहीं कर पाएँगे, तो हम मंजिल की उन सभी सीढ़ियों को कैसे पार कर पाएंगे जो हमें अपने कामयाबी के शिखर तक पहुँचा सकती हैं।
इसलिए दोस्तों "कामयाबी के शिखर तक पहुँचना हैं, तो पहले समय की महत्ता को समझना आवश्यक हैं। “ जिस तरह मैनेजमेंट, बिना समय के अधूरा हैं, वैसे ही कामयाबी बिना समय के और हमारी जिंदगी बिना कामयाबी के अधूरी हैं।“
सोचिए अगर समय की महत्ता नहीं होती तो, न आज हमारा देश इतनी तरक्की कर पाता और ना ही हमारे देश का कोई अस्तित्व होता। क्योंकि हमारे देश का एक-एक पल समय की घड़ी की सुई की तरह चलायमान हैं। अत: हमें समय की यथार्थता को पहचानना होगा। 'समय धन है' की अवधारणा किसी भी काल में झुठलाई नहीं जा सकती।
“समय वह धन है जिसे खो दिया तो अपना जीवन माटी है और पा लिया तो सोना है”
इसलिए प्रण करें कि -
समय की महत्ता को समझना है, इन अमूल्य घड़ियों को नहीं खोना हैं।
कामयाबी के शिखर तक पहुँचना हैं, “समय” का मूलमंत्र अपनाना हैं॥
लोड हो रहा है...
प्रतिक्रियाएँ