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जिंदगी के ये नए मोड़....

मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तब यह जिंदगी उसे बड़ी रंग-बिरंगी लगती है और वह इस रंग-बिरंगी दुनिया में रंगीन सपने सजाने लगता है, अपने साथ कई नए सपने लेकर आता है, और बस लग जाता अपने सपनों को पूरा करने में, उनमें रंग भरने में और पता नहीं कहाँ खो जाती है उसकी वो रंगीन दुनिया, जैसी उसने इस धरती पर जन्म लेते ही देखी थी। उम्र के एक पड़ाव पर उसे अहसास होता है कि उसकी दुनिया तो उसे खुद बनानी है और उसे अपनी जिम्मेदारियों का अहसास होने लगता है, वो सपनों की दुनिया से बाहर निकलने लगता है और चलने लगता है जिंदगी के इस नए मोड़ पर, वास्तविकता की ओर कदम बढ़ाने लगता है। लेकिन फिर भी वो इस उम्मीद के साथ की जैसी रंगीन दुनिया के सपने वो देखा करता था, वो जरूर पूरे होंगे, सोचकर आगे बढ़ता है। जिंदगी जिस राह पर ले जाती है उस राह पर चलने लगता है और इस तरह उसे जिंदगी के सही मायने पता चलते है, जिंदगी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जब वह जिंदगी की अच्छाईयों से और बुराईयों से परिचित होता है। इसलिए कहना चाहती हूँ कि जिंदगी हर मोड़ पर हमें सीख देती है कि मुझे इस तरह से जीओ, बस... अपने सपनों में रंग भरते जाओ तो मैं तुम्हारी हूँ सिर्फ तुम्हारी, अगर एक मोड़ पर तुम्हें जख्म देती हूँ, तो दूसरे मोड़ पर तुम्हारे लिए खुशी लिए, अपनी बाँहें फैलाऐं खड़ी हूँ, जी भरके जीओ मुझे, एक ही बार मिली हूँ तुम्हें, जी लो मुझे, कर लो अपने सपने पूरे, खो जाओ मेरी बाँहों में, जब तक है साँस, महसूस कर लो मेरी रंगीनियत को, फिर ये "जिंदगी" कल आपकी हो न हो।

पोर्टल निर्माता Priyanka Shah
अंतिम बार संशोधित 27 जून, 2009 4:44:53 PM IST